म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? जानें कौन सा म्यूच्यूअल फण्ड है सबसे बेहतर

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?

Mutual Fund Investment – म्यूच्यूअल फण्ड का नाम तो अपने कई बार किसी न किसी के मुंह से सुना होगा और अपने इसके विज्ञापन टीवी पर भी देखे होंगे। उस वक्त आपके दिमाग में एक सवाल आया होगा, आखिर म्यूच्यूअल फंड्स क्या है? उस वक्त आपने कई लोगो से ये सवाल किया होगा, सभी से अलग अलग जवाब भी मिलेगे होंगे। ऐसे में अलग अलग जवाब के चलते सभी कंफ्यूज हो जाते है। इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए ये पोस्ट तैयार की गयी है।

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? 

सीधी और सरल भाषा में कहे तो म्यूच्यूअल फंड्स वो फण्ड है जहाँ पर बहुत सारे निवेशको का पैसा जमा होता है और फिर इसे ऐसे काम में इन्वेस्ट किया जाता है जहाँ पर मुनाफा हो ताकि जिन्होंने म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट किया है उन्हें अपने अपनी रकम से ज्यादा पैसे वापिस मिल सके। इस पूरे फंड्स को एक व्यक्ति मैनेज करता है जिसे प्रोफेशनल फंड्स मेनेजर कहते है। ये वो शख्स है जो पूरे फंड्स पर नजर रखता है और इस पैसो का सही जगह इस्तेमाल करके मुनाफा करता है।

अब तक आप समझ गए होंगे कि म्यूच्यूअल फंड्स क्या है। चलिए अब जानते है कितने तरीके के म्यूच्यूअल फंड्स होते है।

टाइप्स ऑफ़ ऑफ़ म्यूच्यूअल फंड्स 

म्यूच्यूअल फंड्स कई प्रकार के होते है। इनके प्रकार उनकी विशेषताओ पर आधारित है –

  • एसेट के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 
  • संरचना के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 
  • निवेश के लक्ष्यों के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 
  • जोखिम के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 
  • विशेष तरह के म्युचुअल फंड

एसेट के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 

  • इक्विटी फंड | Equity Funds

इस म्यूच्यूअल फंड्स को स्टॉक फंड्स के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स पर मुनाफा ज्यादा होने की उम्मीद होती है लेकिन इसमें पैसे डूबने का खतरा भी अधिक रहता है। इसके पीछे वजह है फंड्स का स्टॉक मार्किट में लगाया जाना। फायदा होगा या नुक्सान वो शेयरस के ऊपर उठने और गिरने पर निर्भर करता है। अगर आप लम्बे समय के लिए निवेश करना चाहते है और मुनाफा ज्यादा कमाना चाहते है तो आप इक्विटी फंड पर निवेश कर सकते है।

  • डेब्ट फंड्स | Debt Funds

इन फंड्स के अंतर्गत फिक्स इनकम वाले सिक्योरिटीज होती है जैसे फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान, मासिक आय प्लान्स, लिक्विड फंड्स, गिल्ट फण्ड, लॉन्ग टर्म बांड, शोर्ट टर्म बांड आदि। इस तरह के प्लान में इंटरेस्ट और मैच्योरिटी डेट फिक्स होती है। अगर आप कम रिस्क वाले फंड्स और नियमित आय पाना चाहते है तो आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते है।

  • मनी मार्किट फंड्स | Money Market Funds

इस फंड्स को मनी मार्किट सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट किया जाता है, उदाहरण के तौर पर टी- बिल्स, सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपॉजिट्स, डेट सिक्योरिटीज। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स में फंड्स मेनेजर पैसे ऐसी जगह इन्वेस्ट करता जहाँ से नियमित रिटर्न्स आते रहे। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स शॉर्ट टर्म होते है और इसमें रिस्क फैक्टर भी बहुत कम होता है।

  • हाइब्रिड फंड्स | Hybrid Funds

ये फंड्स शेयर्स और बांड्स का मिश्रण होता है। इसमें 60 प्रतिशत शेयर्स में और 40 प्रतिशत बांड्स में इन्वेस्ट किए जाते है। ये उन लोगो के लिए सही है जो निम्न लेकिन स्थिर आय योजनाओं की बजाय ज्यादा रिटर्न्स के लिए ज्यादा रिस्क ले सकते है।

संरंचना के आधार पर 

  • ओपन एंडेड फंड्स | Open Ended Funds

ओपन एंडेड फंड्स के अंतर्गत निवेशक म्यूच्यूअल फंड्स खरीदने और इसे बेचने के लिए स्वतंत्र होता है। इसका अर्थ है ये है कि निवेशक इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स जब चाहे ख़रीदे जा सकते है और जब चाहे इसे Net asset value यानी NAV पर बेचे जा सकते है। इस तरह के फंड्स की कोई मैच्योरिटी पीरियड नही होती है।

  • क्लोज्ड एंडेड फंड्स |  Closed Ended Funds

इस तरह के फंड्स को आप इनिशियल पीरियड में ही यानी किसी विशेष तय समय पर खरीद सकते है। वो समय निकलने के बाद आप यूनिट नही खरीद सकते। अगर आपने ये यूनिट्स खरीद लिए है तो आप इसके मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले इसे बेच नही सकते है।

  • इंटरनल फंड्स | Internal Funds

इसे ओपन एंडेड और क्लोज्ड एंडेड फंड्स का मिश्रण कह सकते है। इसे इनकम फंड्स के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के फंड्स में 70 दिनों में इसे ओपन किया जाता है जिस वक्त ये फंड्स खरीदे या बेचे जा सकते है या इसे जारी भी रख सकते है। ये उन लोगो के लिए जो कम समय में बड़ी मात्रा में पैसा इकठ्ठा करना चाहते है।

निवेश के लक्ष्यों के आधार पर म्यूच्यूअल फंड्स 

ग्रोथ फंड | Growth Funds

इस तरह के फंड्स में इन्वेस्टर का पैसे ग्रो कर रही कम्पनीज यानी जो कंपनियां सफल हो रही है और बढ़ रही है, उनमें लगाया जाता है। इस म्यूच्यूअल फंड्स में फायदा ज्यादा हो सकता है लेकिन इसमें रिस्क भी ज्यादा होता है। ये उनके लिए सही है जिनके पास बहुत पैसा है और वो इस तरह के रिस्क लेकर इन्वेस्ट कर सकते है।

  • इनकम फंड्स | Income Funds

इस तरह के फंड्स में पैसा गवर्नमेंट की सिक्योरिटीज पर इन्वेस्ट किया जाता है जहाँ से रेगुलर इनकम आती रहती है। इस तरह के फंड्स में रिस्क नाममात्र का होता है। 

  • लिक्विड फंड्स | Liquid Funds

ये भी डेब्ट फंड्स का एक प्रकार है। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स शोर्ट टर्म होते है। इसमें पैसा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, कॉल मनी, ट्रेजरी बिल्स पर लगाया जाता है। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स की मैच्योरिटी पीरियड 91 दिनों की होती है। इस तरह के फंड्स में रिटर्न्स अच्छा मिलता है। 

  • टैक्स सेविंग फंड्स | Tax-Saving Funds

इन फंड्स को ELSS नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के फंड्स के जरिए टैक्स से बचा जा सकता है साथ ही मुनाफा भी कमाया जा सकता है वो भी तीन साल में। ये सैलरी पाने वाले लोगो और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट करने वालो के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

  • अग्रेसिव ग्रोथ फंड्स | Aggressive Growth Funds

इस तरह के फंड्स में रिस्क ज्यादा होता है। इसमें मुनाफा स्टॉक मार्किट के उतार चढाव पर निर्भर करता है इसलिए इसमें बीटा (Beta) के आधार पर इन्वेस्टमेंट किया जाता है। अगर बीटा (Beta) 1. है तो अग्रेसिव फंड्स ज्यादा आएगा यानी 1.10 या उससे ज्यादा।

  • कैपिटल प्रोटेक्शन फंड् | Capital Protection Funds

अगर आप रिस्क कम लेना चाहते है और अपने इन्वेस्ट को बचाए रखना चाहते है तो ये फंड्स बेस्ट है। इसमें रिटर्न कम मिलता है लेकिन रिस्क भी बहुत कम होता है। इसमें पैसा बांड्स और इक्विटीज पर लगाया जाता है। ये म्यूच्यूअल फंड्स कम से कम तीन साल के लिए होता है।

  • फिक्स्ड मैच्योरिटी फंड्स | Fixed Maturity Funds

फिक्स्ड मैच्योरिटी फंड्स तय समय के लिए होते है। मैच्योरिटी पीरियड्स 1 से 5 साल तक का हो सकता है। इसमें पैसा बांड्स, मनी मार्केट्स और सिक्योरिटीज पर इन्वेस्ट किया जाता है।

  • पेंशन फंड्स | Pension Funds

इस तरह के फंड्स में व्यक्ति जब काम कर रहा होता है वो इन्वेस्ट करता जाता है ताकि रिटायरमेंट की उम्र के बाद उनको  रेगुलर इनकम मिलता रहे।इस तरह के फंड्स में रिटायरमेंट की उम्र से पहले पैसा नही निकाला जा सकता। रिटायरमेंट की उम्र 58  साल होती है। इस उम्र का हो जाने के बाद इस म्यूच्यूअल फंड्स में से एक बड़ी अमाउंट या हर महीने रेगुलर इनकम के तौर पर निकाला जा सकता है। 

जोखिम के आधार पर 

  • वैरी लो रिस्क फंड्स | Very Low-Risk Funds

इस तरह के फंड्स अल्ट्रा शोर्ट टर्म या लिक्विड फंड्स होते है जो एक महीने से लेकर एक साल के होते है। इसमें रिटर्न कम मिलता है। ये छोटे मोटे फाइनेंसियल गोल्स के लिए सही है।

  • लो रिस्क फंड्स | Low-Risk Funds

इस तरह के फंड्स अल्ट्रा शॉर्ट टर्म, लिक्विड आदि में पैसा लगाते है। इसमें रिटर्न 6 से 8 प्रतिशत होता है। 

  • मीडियम रिस्क फंड्स | Medium-risk Funds

इस तरह के फंड्स में रिस्क फैक्टर मध्यम होता है। इसमें पैसे का कुछ हिस्सा डेब्ट फंड्स में और बाकी इक्विटी फंड्स में लगाया जाता है। इसमें रिटर्न 9 से 12 प्रतिशत होता है।

  • हाई रिस्क फंड्स | High-risk Funds

इस तरह के फंड्स में सबसे ज्यादा रिस्क होता है। इसमें वो इन्वेस्टर इन्वेस्ट करते है जो ये जोखिम उठा सकते है और जिन्हें ज्यादा रिटर्न चाहिए होता है। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स में बाज़ार की अस्थिरता का प्रभाव पड़ता है। इसमें 15  प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल सकता है।

खास म्यूच्यूअल फंड्स|  Specialized Mutual Funds

  • सेक्टर फंड्स | Sector Funds

इस तरह के फंड्स में एक खास सेक्टर पर पैसा लगाया जाता है जिसमे नियमित ग्रोथ होती रहती है जैसे फार्मा या आईटी सेक्टर पर। इस तरह के म्यूच्यूअल फण्ड में रिस्क ज्यादा होता है लेकिन रिटर्न भी ज्यादा होता है। इस तरह के फंड्स में आपको उस सेक्टर पर नजर रखनी होती ताकि अगर गिरवट आए तो आप तुरंत उस फंड्स को बेच सके। 

  • इंडेक्स फंड्स | Index Funds

इंडेक्स फंड्स एक तरह का पैसिव फंड्स है जिसमे निफ्टी,सेंक्सेक्स आदि इंडीसेस पर इन्वेस्ट किया जाता है। जो भी पैसा निफ्टी के इंडेक्स फंड्स पर इन्वेस्ट होता है वो वेटेज के आधार पर इन्वेस्ट किया जाता है। इस तरह के फंड्स को मैनेज करने के लिए फंड्स मेनेजर की जरुरत नही पडती इसलिए इसका खर्चा कम होता है।

  • फंड्स ऑफ़ फंड्स | Funds of Funds

इस फण्ड में एक फंड्स को कई फंड्स में इन्वेस्ट किया जाता है।

  • इमर्जिंग मार्किट फंड्स | Emerging market Funds

इस तरह के म्यूच्यूअल फण्ड में उभरती मार्किट पर निवेस्ट किया जाता है। उभरती मार्किट पर इन्वेस्ट करना रिस्की है लेकिन अगर लॉन्ग टर्म में किया जाए तो फायदा हो सकता है।

  • इंटरनेशनल फॉरेन फंड्स | International/ Foreign Funds

इस तरह के फंड्स में पैसे का 60 प्रतिशत घरेलु इक्विटी फंड्स में और बाकी विदेशी फंड्स में इन्वेस्ट किया जाता है।इस तरह के फंड्स में रिटर्न अच्छे हो सकते है। ये उन लोगो के लिए अच्छा है जो विदेश में अपना पैसा इन्वेस्ट करना चाहते है।

  • ग्लोबल फंड्स | Global Funds

इसमें पैसे दुनिया की विभिन्न मार्किट में इन्वेस्ट किया जाता है। इसमें रिस्क लेवल हाई है लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटर्न भी ज्यादा हो सकता है। इसमें दुनियां के मार्केट्स के अलावा आपके अपने मार्किट में इन्वेस्ट किया जा सकता है।

  • रियल एस्टेट फंड्स| Real Estate Funds

इस तरह के फंड्स में पैसे पहले से स्थापित रियल एस्टेट कंपनी में इन्वेस्ट किया जाता है। इसमें अगर लॉन्ग टर्म में इन्वेस्ट किया जाए तो भविष्य में खरीदी जाने वाले प्रॉपर्टीज में कुछ रहत मिल सकती है।

  • गिफ्ट फंड्स | Gift funds

इस तरह के फंड्स परिवार के सदस्य के भविष्य को फाइनेंसियली सुरक्षित रखने के लिए गिफ्ट किए जा सकते है।

  • कमोडिटी फोकस्ड स्टॉक फंड्स | Commodity-focused Stock Funds

इस तरह के फंड्स रिस्की होते है क्योकि ये एक कमोडिटी यानि एक चीज पर इन्वेस्ट किए जाते है जैसे कॉपर, गोल्ड आदि। भारत में गोल्ड में आसानी से म्यूच्यूअल फंड्स के जरिए इन्वेस्ट कर सकते है, बाकि कमोडिटी के लिए आपको कमोडिटी बिज़नस से शेयर या यूनिट्स खरीदने होंगे।

  • मार्किट न्यूट्रल फंड्स | Market Neutral Funds

इस तरह के फंड्स समान अनुपात में शोर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म शेयर्स में इन्वेस्ट किए जा सकते है। इस तरह के फंड्स में रिटर्न ज्यादा है।

म्यूच्यूअल फंड्स के फायदे

  • एक्सपर्ट फंड्स मेनेजर की सेवाओ का फायदा 

अगर अपने हिसाब से शेयर मार्किट में पैसा इन्वेस्ट किया जाए तो जोखिम ज्यादा होगा क्योकि इसमें शेयर मार्किट में उतार चढाव आते रहते है। ऐसे अगर किसी एक्सपर्ट की देख रेख में इन्वेस्ट किया जाए तो रिस्क कम होता है और रिटर्न भी ज्यादा मिल सकता है। ये मेनेजर बहुत अनुभवी और विशेषज्ञ होते है जो पैसा सही जगह पर लगाते है।

  • कम पूँजी का निवेश 

इसमें आप कम से कम पैसो को भी इन्वेस्ट कर सकते है। म्यूच्यूअल फंड्स में आप 500 प्रति माह से लेकर ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्ट कर सकते है। इस वजह से हर आम आदमी म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट कर सकता है।

  • म्यूच्यूअल फंड्स में से पैसा निकालना आसान 

म्यूच्यूअल फंड्स में लिक्विडिटी की सहुलियंत होती है, इसका अर्थ है आप म्यूच्यूअल फंड्स में से मैच्योरिटी पीरियड से पहले पैसे निकल सकते है। 

Read Also – Share Market Kya Hai ?

  • अलग अलग सेक्टर में निवेश 

म्यूच्यूअल फंड्स के जरिए आप अलग अलग सेक्टर पर निवेश कर सकते है।

  • समय की बचत 

म्यूच्यूअल फंड्स में एक बार इन्वेस्टमेंट के बाद परेशानी नही होती है। आपको शेयर मार्केट्स पर नजर रखने की जरुरत नही है इससे आपका समय बचता है।

  • अपनी जरुरत के हिसाब से इन्वेस्ट कर सकते है

म्यूच्यूअल फंड्स में आप अपनी जरुरत के हिसाब से इन्वेस्टमेंट कर सकते है। 

  • कम टैक्स 

म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करने वाले बाकी लोगो के मुकाबले कम टेक्स भरते है।  

  • पैसा सुरक्षित होना 

म्यूच्यूअल फंड्स में पैसा सुरक्षित होता है। कुछ फंड्स होते है जिसमें रिस्क ज्यादा होता है लेकिन कुछ ऐसे भी होते है जिसमे रिस्क कम या नाममात्र का होता है।

  • कम खर्चा 

दूसरो तरह के इन्वेस्ट पर 2 से 3 प्रतिशत खर्चा होता है, म्यूच्यूअल फंड्स में 1 से 2 प्रतिशत खर्चा होता है।

  • आसानी से इन्वेस्ट करना 

म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करना आसान है। उनके एजेंट  द्वारा पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है जिसके आधार पर और जरुरत के हिसाब से इन्वेस्ट किया जा सकता है।

म्यूच्यूअल फंड्स की टॉप फाइव योजनाएं  

ये योजनाए स्टॉक्स होल्डिंग्स, रिटर्न, सी टी सी, और इस बात पर आधरित है कि फंड्स का पैसा किन कम्पनीज में इन्वेस्ट किया जाता है। 

  • एल एंड टी इंडिया वैल्यू म्यूच्यूअल फण्ड 

ये म्यूच्यूअल फंड्स 8 जनवरी 2008 में लांच हुआ था। इसका NAV 34.1 है। इस म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसी बैंक, इन्फोसीस लिमिटेड, एसबीआई, आईटीसी, एचडीएफसी बैंक आदि शीर्ष कम्पनीज में इन्वेस्ट होता है। इस फंड्स में रिटर्न 3 साल में 12.24 प्रतिशत और 5 साल में 17.2 प्रतिशत है।

  • मिर्री एस्सेट इंडिया इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 

ये दूसरा अच्छा म्यूच्यूअल फण्ड है। ये फण्ड 4 अप्रैल 2008 में लांच हुआ है। इस फंड्स का पैसा एचडीएफसी बैंक,रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऐक्सिस बैंक, आईसीआईसी बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस, इनफ़ोसिस आदि में इन्वेस्ट होता है। रिटर्न 3 साल में 15.66 प्रतिशत, 5 साल में 15.87 प्रतिशत और 10 साल में 19.66 प्रतिशत है। इसका NAV 49.73 है।

  • आदित्य बिरला फ्रंटलाइन इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स

ये म्यूच्यूअल फण्ड 23 दिसम्बर 1984 को लांच हुआ था। इसका NAV है 218.74। इस फंड्स में पैसा एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसी बंद, इनफ़ोसिस, आईटीसी, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज आदि में इन्वेस्ट होता है। इसका रिटर्न 3 साल में 10.85 प्रतिशत, 5 साल में 11.63 प्रतिशत और 10 साल में 15.08 प्रतिशत होता है। 

  • एसबीआई मैगनम मल्टीकैप म्यूच्यूअल फण्ड 

इस म्यूच्यूअल को को सितम्बर 2005 में लांच किया गया था। इस फण्ड में पैसा एचडीएफसी बैंक, इनफ़ोसिस, आईसीआईसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, ऐक्सिस बैंक आदि में इन्वेस्ट होता है। इसका NAV 47.566 है। इसका 3 साल में 12.32 प्रतिशत, 5 साल में 16.07 प्रतिशत और 10 साल में 15.12 प्रतिशत रिटर्न है।

  • एसबीआई ब्लूचिप म्यूच्यूअल फण्ड 

ये म्यूच्यूअल फण्ड 14 फरवरी 2006 को लांच हुआ था। इसका NAV 38.47 है। इस फण्ड का पैसा एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, आईसीआईसी बैंक, हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन, एसबीआई, इनफ़ोसिस आदि में इन्वेस्ट होता है। इसका रिटर्न 3 साल में 9.9 प्रतिशत। 5 साल में 13.59 प्रतिशत और 10 साल में 15.21 प्रतिशत है।

म्यूच्यूअल फण्ड में पहली बार निवेश की शुरुआत कैसे करें

म्यूच्यूअल फंड्स की इतनी जानकारी के बाद आइए जानते है इसमें इन्वेस्ट कैसे करते है। इसमें इन्वेस्ट के लिए KYC की जरुरत पड़ेगी, KYC यानी Know your customer फॉर्म। आपको सबसे पहले ये फॉर्म भरना होगा। अगर पहले से भरा हुआ है तो इसे फिर से भरने की जरुरत नही है। KYC हुआ है या नही तो इसकी जानकारी के लिए https://www।cvlkra।com पर या https://camskra।com/ पर चेक किया जा सकता है। चेक करने के लिए पैन कार्ड नंबर इस्तेमाल करना होगा। अगर KYC फॉर्म नही भरा है तो इस फॉर्म के साथ साथ कुछ और जरुरी चीजो की जरुरत पड़ेगी जैसे आपका पासपोर्ट साइज़ फोटो, आधार कार्ड या कोई और पहचान पत्र, एड्रेस प्रूफ  जैसे बिजली का बिल या राशन कार्ड। इन सबकी फोटोकॉपी और ओरिजिनल दोनों ले जाना जरुरी है। म्यूच्यूअल फंड्स के एजेंट के जरिए भी इन्वेस्ट किया जा सकता है या सीधे  म्यूच्यूअल फण्ड के ऑफिस जाकर इन्वेस्ट कर सकते है। वहां जाकर जानकारी ले और अपने सहूलियत और जरुरत को मैच करता म्यूच्यूअल फण्ड ख़रीदा जा सकता है। इसके लिए फॉर्म भरना होगा और राशि चेक के रूप में देनी होगी, इसलिए चेक बुक ले जाना जरुरी है।

आप चाहे तो ऑनलाइन भी इन्वेस्ट कर सकते है। म्यूच्यूअल फंड्स की अपनी ऑफिसियल वेबसाइट है, उसके जरिए कर सकते है। इसके अलावा बहुत सारी साइट्स है जहाँ आप फॉर्म भरके म्यूच्यूअल फंड्स खरीदे जा सकते है।

Mutual Fund में निवेश की पूरी जानकारी हिंदी में जान ने के लिए यहाँ जाएँ। 

म्यूच्यूअल फण्ड सिप (SIP) में कैसे निवेश करें?

SIP अर्थात सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। इसमें म्यूच्यूअल फंड्स में खाते में से पैसा अपने आप निवेश हो जाता है। इस स्कीम में इन्वेस्टर बैंक को ये बताता है कि वो किस कंपनी या म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा इन्वेस्ट करनी की परमिशन बैंक तो दे रहा है। इसके लिए इन्वेस्टर को एक फॉर्म भरना पड़ेगा। इस फॉर्म का नाम है ECS। इस स्कीम में आप कम से कम अमाउंट में शुरू कर सकते है।

 क्या म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना सही है? 

म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करना सही है। इस फंड्स में रिस्क फैक्टर कम है, आप फंड्स में से पैसे निकाल सकते है और रिटर्न भी बैंक के फिक्स डिपाजिट से ज्यादा होता है। सिर्फ एक बात का ध्यान रखे कि इन्वेस्ट करने से पहले ये जरुर पता करे कि पैसा किन कम्पनीज में इन्वेस्ट होगा ताकि अच्छे रिटर्न की उम्मीद बढ़ जाए। 

Leave a comment